छत्तीसगढ़बिलासपुर संभाग

बिलासपुर तहसील में पदस्थ लिपिक वर्ग के कर्मचारी बिना रिश्वत के नही करते काम, टेबल टू टेबल रिश्वतखोरी

बिलासपुर। न्यायधानी के तहसील में भले ही हाईकोर्ट का दखल रहा हो किंतु उसके बाद भी तहसील में कोई ख़ासा सुधार देखने को नही मिल रहा है! प्रकरण के फाइल को आगे बढ़ाने के लिए टेबल टू टेबल रिश्वत लिया जाता है। इसका स्टिंग भी किया गया है जिस काम के लिए शासकीय शुक्ल लागू ही नही है उस कार्य के लिए भी बाबू/लिपिक वर्ग के कर्मचारी रिश्वत की मांग करते है जबकि इन कर्मचारियों को शासकीय मासिक वेतन भुगतान किया जाता है वे भी ख़र्चा पानी मांग रहे है इन शासकीय कर्मचारियों को शासकीय मासिक वेतन भुगतान देकर जनता के जिस कार्य का जिम्मा सरकार ने सौपा है वे कर्मचारी उन्ही जनता से शासकीय कार्य के लिए अतिरिक्त शुल्क (रिश्वत) की मांग करते है जबकि उसी तहसील में पदस्थ अधिकारी प्रकरणों के फ़ाइल पर हस्ताक्षर कर रहे है और उसके बदले किसी प्रकार के अतिरिक्त शुल्क आवेदकों से नही मांग रहे है। इन कर्मचारियों को आख़िर किनका संरक्षण है जो खुल्लेआम रिश्वत की मांग करते है यह समझ से परे है बहरहाल बता दे कि तहसील में शासकीय कार्य कराने के ऐवज में कर्मचारी पैसा मांगते कैमरे में कैद हो गए है अन्य कर्मचारियों की भी बारीकी से जाँच पड़ताल की जा रही है किस टेबल पर किस काम के लिए कौन कर्मचारी कितना पैसा लेता है इसका खुलासा भी बहुत जल्द अगले अंक में वीडियो के साथ प्रकाशित करेंगे।।।। क्रमशः….

वकीलों से भी लेते है रिश्वत

कहा जाता है कि संविधान की पढ़ाई करने वाले वकीलों को शासकीय कार्य के संबंध में अधिक जानकारी होता है फिर भी कुछ अधिवक्ताओं को देखा गया है कि लिपिक/बाबू वर्ग के कर्मचारियों को रिश्वत दिया जाता है रकम के बदले किसी प्रकार का रशीद भी नही लिया जाता है इसका भी स्टिंग किया गया है इससे आप समझ सकते है कि जो लोग रिश्वत की रकम देने में असक्षम है उनके फाइलों पर क्या तहसील में पदस्थ कर्मचारी ध्यानाकर्षण करते होंगे?

भाजपा नेताओं ने किया था दावा

पूर्व मंत्री वर्तमान विधायक अमर अग्रवाल के द्वारा कांग्रेस की सत्ता में तहसील के रिश्वतखोरी को लेकर नेहरू चौक में जमकर प्रदर्शन किया गया किस काम के लिए कितना पैसा उसका रेट लिस्ट भी जारी किया गया किंतु सत्ता तो बदल गई लेकिन तहसील के कर्मचारियों की आदत नही बदली।

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